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🌍 विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) रिपोर्ट ? 2024 बना अब तक का सबसे भयानक साल एशिया में जलवायु संकट की चेतावनी !

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट प्रकृति ने दी सबसे बड़ी चेतावनी !

कल्पना कीजिए कि एक पूरा महाद्वीप गर्मी से झुलस रहा हो, समुद्र किनारे धीरे-धीरे डूब रहे हों, बर्फ की चोटियाँ पिघलती जा रही हों और लोग बाढ़ व तूफानों से बेघर हो रहे हों। यह कोई विज्ञान कथा नहीं, बल्कि एशिया की 2024 की सच्चाई है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट “State of the Climate in Asia 2024” के अनुसार, एशिया अब वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी गति से गर्म हो रहा है। विश्व मौसम विभाग संगठन (WMO) की इस रिपोर्ट को जून 2025 में जारी किया गया और इसने साफ कर दिया कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती है।

1. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 अब तक का सबसे गर्म साल

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) रिपोर्ट के अनुसार सन 1961 से 1990 और 1991 से 2024 की दो प्रमुख अवधि के दौरान आर्कटिक तक फैले सबसे बड़े भू भाग वाले महाद्वीप एशिया की धरती और महासागर औसत से अधिक तेजी से गर्म हुए हैं इसका क्षेत्र आर्कटिक तक फैले होने कारण इसकी जलवायु संवेदनशीलता बढ़ गई । साल 2024 में एशिया का औसत तापमान 1991 से 2020 के औसत तापमान से 1.04 डिग्री सेल्सियस अधिक था

2015 से लेकर 2024 तक लगातार 10 साल एशिया के इतिहास में सबसे गर्म साल रहे।

जापान में 2024 की गर्मी ने अब तक के सभी औसत तापमान रिकॉर्ड को पार कर दिया।

भारत में गर्मी से 450 से अधिक मौतें दर्ज की गईं, जिससे यह स्वास्थ्य आपातकाल का कारण बना।

थाईलैंड, म्यांमार, सऊदी अरब और रूस में भी गर्मी ने नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।

ये घटनाएं केवल मौसम नहीं, बल्कि मानवता के लिए खतरे की घंटी हैं।

2. समुद्र स्तर और ग्लेशियरों का संकट

जलवायु परिवर्तन केवल हवा और तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरती की भूगोल और पारिस्थितिकी तंत्र को भी बदल रहा है।

एशिया में समुद्र स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि:समुद्र स्तर वैश्विक औसत से तेज़ गति से बढ़ रहा है। इससे तटीय शहरों में बाढ़ और विस्थापन का खतरा बढ़ गया है

हिमालय और तिब्बत में ग्लेशियरों की बर्बादी: 24 में से 23 ग्लेशियरों ने अपना द्रव्यमान खो दिया।

नेपाल के कोशी क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की घटना ने 130+ लोगों को विस्थापित किया।

3. 2024 की प्रमुख मौसम आपदाएं: जब प्रकृति ने कहर बरपाया

वर्ष 2024 में कई चरम वर्षा की घटनाएं हुईं। वसंत ऋतु में, मध्य एशिया, पश्चिमी एशिया, दक्षिण-पश्चिमी एशिया और दक्षिणी चीन में कई चरम वर्षा की घटनाएं हुईं। पिछली सर्दियों में सामान्य से अधिक बर्फ जमा होने के बाद भारी हिमपात और मार्च में रिकॉर्ड-उच्च चरम वर्षा के कारण मध्य एशिया के बड़े क्षेत्रों में व्यापक रिकॉर्ड-तोड़ बाढ़ आई, मुख्य रूप से कजाकिस्तान और दक्षिण-पश्चिमी रूसी संघ में। बांध टूट गए, 12 000 से अधिक आवासीय इमारतें जलमग्न हो गईं और 118 000 से अधिक लोगों को निकाला गया। इसे कम से कम 70 वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे खराब बाढ़ के रूप में मान्यता दी गई थी।

ऐतिहासिक बारिश और बाढ़: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में, खतम अल शाकिया (अल ऐन) में 24 घंटों में 259.5 मिमी बारिश हुई, जो 1949 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यूएई में देखी गई सबसे भारी बारिश में से एक है। दुबई एयरपोर्ट पर 15 और 16 अप्रैल को 36 घंटों में 162.8 मिमी बारिश हुई, जिसमें 16 अप्रैल को 142.0 मिमी बारिश शामिल है, जिससे उड़ानें बुरी तरह बाधित हुईं। UAE में 1949 के बाद की सबसे अधिक वर्षा ।

नेपाल (सितंबर 2024): बाढ़ में 246 मौतें और NPR 12.85 अरब की आर्थिक क्षति।

भारत (केरल): वायनाड जिले में भारी वर्षा से 350+ मौतें।श्रीलंका (दिसंबर 2024): बाढ़ से 4.5 लाख लोग प्रभावित, 5,000+ विस्थापित।

🌾 सूखा और फसलें:

चीन में भीषण सूखे से 48 लाख लोग प्रभावित, फसलें नष्ट और आर्थिक हानि भारी रही।

आकाशीय बिजली:

भारत में 1,300+ लोग मारे गए, केवल जुलाई में 72 मौतें हुईं।

4. 2024 में बने चक्रवात: तेज़ हवाओं के साथ मौतें और बर्बादी

वर्ष 2024 के दौरान, इस क्षेत्र में चार नामित उष्णकटिबंधीय चक्रवात बने उत्तरी हिंद महासागर के ऊपर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की संख्या चक्रवातों के औसत से थोड़ी कम थी। चार में से तीन चक्रवात बंगाल की खाड़ी (रेमल, दाना, फेंगल) के ऊपर बने और एक अरब सागर (आसना) के ऊपर बना।

🌀 रिमाल (बंगाल की खाड़ी): भीषण चक्रवाती तूफान रिमाल ने 26 मई 2024 को बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल में मोंगला और खेपुपारा तटों के पास दस्तक दी। बांग्लादेश में, 27 मई को सबसे अधिक हवा की गति 111 किमी/घंटा दर्ज की गई और अत्यधिक भारी वर्षा के साथ तूफानी लहरों के कारण तटीय जिलों में 2.5 मीटर तक बाढ़ आ गई।

🌀 असना (अरब सागर):अगस्त में अरब सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान असना विकसित हुआ, जो एक दुर्लभ घटना है – ऐसा 1891 के बाद से केवल तीन बार हुआ है। ओमान पर तूफान के प्रभाव में 3 से 5 मीटर तक की ऊंची लहरें शामिल थीं।

🌀 डाना और फैंगल: चक्रवाती तूफान फैंगल 30 नवंबर को भारत में दस्तक देने से पहले श्रीलंका के करीब पहुंच गया था। श्रीलंका में भारी बारिश, तेज हवाएं, आंधी और बिजली गिरने से बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम संबंधी घटनाएं हुईं। 3 दिसंबर तक, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र ने 18 लोगों की मौत और लगभग 5,000 लोगों के विस्थापित होने की सूचना दी। प्रभावित क्षेत्रों में 450,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए।

अन्य उष्णकटिबंधीय चक्रवात

वर्ष का सबसे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात, यागी, 31 अगस्त को फिलीपींस के पूर्व में बना और लूजोन द्वीप के उत्तरी भाग को पार कर गया, 5 सितंबर को दक्षिण चीन सागर के उत्तरी भाग में अपनी चरम तीव्रता (105 नॉट्स की अधिकतम निरंतर हवाओं और 915 hPa के केंद्रीय दबाव के साथ) पर पहुंच गया।

टाइफून गेमी, जो 20 जुलाई को फिलीपींस के पूर्व में बना था, 24 जुलाई को चीन के ताइवान, प्रांत के पूर्वी तट पर अपनी अधिकतम तीव्रता (90 नॉट की अधिकतम हवा की गति और 935 hPa के केंद्रीय दबाव के साथ) पर पहुंच गया। द्वीप को पार करने के बाद, यह फ़ुज़ियान प्रांत से टकराया और उत्तर-पश्चिम की ओर अंतर्देशीय चीन में चला गया।

टाइफून कोंग-रे, जो 24 अक्टूबर को फिलीपींस के पूर्व में बना था, 30 अक्टूबर को लुज़ोन द्वीप के उत्तर-पूर्वी तट पर अपनी अधिकतम तीव्रता (100 नॉट की अधिकतम निरंतर हवा की गति और 925 hPa के केंद्रीय दबाव के साथ) पर पहुंच गया

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण ?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की इस रिपोर्ट ने दुनिया को चेताया कि एशिया में रिकॉर्ड-तोड़ तापमान, समुद्र स्तर में वृद्धि और ग्लेशियरों का पिघलना केवल वैज्ञानिक आंकड़े नहीं, बल्कि जीवन और अस्तित्व का प्रश्न बन चुके हैं।

इन आपदाओं से न केवल जानें गईं, बल्कि अर्थव्यवस्था, कृषि, शिक्षा और जीवनशैली पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा।

यह रिपोर्ट एक चेतावनी है: यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और आम जनता के लिए एक “Wake-up Call” है, कि यदि अब भी हम नहीं जागे तो भविष्य में स्थितियाँ और भी भयावह होंगी।

भारत और एशिया के लिए क्या है भविष्य ?

भारत और उसके पड़ोसी देश जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं।

अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, और तूफान हर वर्ष की सामान्य घटनाएं बनते जा रहे हैं।

जोखिम बढ़ रहे हैं, शहरों में बाढ़ और प्रदूषण।

ग्रामीण क्षेत्रों में सूखा और फसलें बर्बाद।

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर फटना और बर्फबारी में कमी।

समाधान की दिशा में जरूरी कदम

1. स्थानीय स्तर पर जागरूकता: स्कूली पाठ्यक्रम में जलवायु शिक्षा शामिल होनी चाहिए।

2. हरित ऊर्जा का बढ़ावा:कोयला और तेल पर निर्भरता कम कर सौर, पवन और जल ऊर्जा को प्राथमिकता दें।

3. जलवायु अनुकूलन रणनीति: विशेषकर बाढ़ और चक्रवात-प्रवण क्षेत्रों के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: एशियाई देशों को मिलकर जलवायु संकट से निपटने के लिए साझा रणनीति बनानी होगी।

निष्कर्ष: जलवायु बदलाव – अब या कभी नहीं

2024 ने हमें एक साफ संकेत दिया है – जलवायु परिवर्तन केवल भविष्य की समस्या नहीं है, यह आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है।

अगर सरकारें, वैज्ञानिक और आम नागरिक मिलकर अभी भी ठोस योजना नहीं बनाते, तो आने वाले वर्षों में हालात और बदतर हो सकते हैं।

अब वक्त है जागने का, नहीं तो प्रकृति हमें और अधिक मजबूती से जगाएगी – लेकिन तब शायद देर हो चुकी होगी।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के बारे मे विशेष जानकारी

1- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना

23 मार्च 1950

2- अध्यक्ष

अब्दुल्लाह अल मंडौस ,( संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति), कार्यकाल 2027 तक रहेगा

3- सदस्य देश 193

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