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शिक्षा सर्वेक्षण 2025: केवल 55% छात्र ही सुलझा पा रहे हैं बेसिक गणित, जानें पूरे सर्वे की रिपोर्ट

शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education – MoE) द्वारा जारी किए गए शिक्षा सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट ने देशभर के शिक्षा क्षेत्र में चिंता की लहर दौड़ा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 3, 6 और 9 के छात्र बुनियादी गणित और भाषा कौशल में अपेक्षित स्तर पर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषकर गणित के परिणाम चौंकाने वाले हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या हमारी प्राथमिक शिक्षा पद्धति प्रभावी है ? शिक्षा सर्वेक्षण 2025 देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों की 74,229 स्कूलों को शामिल किया गया। कुल मिलाकर 21,15,022 छात्रों ने इस सर्वे में भाग लिया। यह लेख इसी सर्वेक्षण पर आधारित है और इसका विश्लेषण करेगा कि छात्रों का प्रदर्शन कैसा रहा, किन विषयों में कमी पाई गई, और समाधान क्या हो सकता है।

शिक्षा सर्वेक्षण 2025 में कक्षा 3 के छात्रों की स्थिति

सिर्फ 55% ही सही क्रम में रख पाए संख्या

रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 3 के सिर्फ 55 प्रतिशत छात्र ही 99 तक की संख्याओं को आरोही (Ascending) या अवरोही (Descending) क्रम में सही तरीके से रख पाने में सक्षम हैं। यह एक बुनियादी योग्यता है जिसे इस स्तर तक बच्चों में होना आवश्यक माना जाता है। इसका अभाव आगे की शिक्षा में बाधा बन सकता है और समग्र शैक्षिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

शिक्षा सर्वेक्षण 2025 में कक्षा 6 के छात्र बेसिक मैथ में सिर्फ 53% ही सक्षम

कक्षा 6 के छात्रों की स्थिति भी विशेष सुधार की मांग करती है। रिपोर्ट बताती है कि केवल 53 प्रतिशत छात्र ही जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे बेसिक मैथ ऑपरेशन को सही तरीके से हल कर पा रहे हैं। इसका मतलब है कि लगभग आधे छात्र इन बुनियादी गणितीय कौशलों में पिछड़ रहे हैं।

यह छात्र 10 तक के जोड़ और गुणा के पहाड़े तो जानते हैं, लेकिन जब वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने की बात आती है तो वे चार मूल गणनाओं का सही उपयोग नहीं कर पाते। यह दर्शाता है कि स्कूलों में सैद्धांतिक शिक्षा तो दी जा रही है, लेकिन प्रायोगिक और दैनिक जीवन से जुड़ी शिक्षा में कमी है।

टॉप प्रदर्शन करने वाले राज्य और जिले (Grade 6)

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किए गए मूल्यांकन के अनुसार:

केरल, पंजाब और दादरा नगर हवेली एवं दमन और दीव ने कक्षा 6 के प्रदर्शन में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

इन राज्यों के छात्र गणित और भाषा जैसे विषयों में बेहतर समझ और निष्पादन के लिए जाने गए।

इन क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में भी छात्रों ने औसतन बेहतर स्कोर दर्ज किए हैं।

कमजोर प्रदर्शन वाले जिले

हालांकि कुछ राज्यों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं मेघालय के तीन जिले –नॉर्थ गारो हिल्स,

साउथ गारो हिल्स,

साउथ वेस्ट गारो हिल्स ने सबसे कमजोर प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, शि योमी (Shi Yomi), अरुणाचल प्रदेश को भी खराब प्रदर्शन वाले जिलों की सूची में शामिल किया गया है।

इन क्षेत्रों में छात्रों के गणितीय कौशल और अवधारणात्मक समझ में कमी देखी गई है, जो शिक्षा की मूलभूत चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

गणित में पीछे, भाषा में बेहतर

सर्वे के अनुसार, कक्षा 6 में छात्रों ने गणित के मुकाबले भाषा विषय में बेहतर प्रदर्शन किया। औसतन 57 प्रतिशत अंक भाषा में प्राप्त हुए जबकि गणित में यह आंकड़ा सिर्फ 46 प्रतिशत तक सिमट गया। यही नहीं, ‘The World Around Us’ नामक अतिरिक्त विषय में भी छात्रों ने बेहतर समझ दिखाई, जो पर्यावरण और समाज जैसे विषयों को कवर करता है।

कक्षा 9 के छात्र: बेहतर प्रदर्शन का संकेत

कक्षा 9 के छात्रों ने सभी विषयों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। खासतौर पर केंद्र सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों ने सभी विषयों में अच्छा स्कोर किया, जबकि राज्य सरकार के स्कूलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। निजी स्कूलों के छात्रों ने विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में अच्छे अंक अर्जित किए, लेकिन गणित में उनके अंक फिर भी कम थे।

शिक्षा सर्वेक्षण 2025 गणित बना सबसे कमजोर विषय

सभी वर्गों और क्षेत्रों में गणित का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। चाहे सरकारी स्कूल हों या निजी, गणित में सर्वाधिक कम स्कोर देखने को मिला। जबकि भाषा विषय में छात्र अच्छे अंक लाने में सफल रहे। इससे स्पष्ट होता है कि भाषा अधिगम की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत बेहतर है लेकिन गणित को लेकर छात्रों में डर या समझ की कमी हो सकती है।

ग्रामीण बनाम शहरी प्रदर्शन

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों में भी एक रोचक भिन्नता देखने को मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में कक्षा 3 के छात्रों ने भाषा और गणित दोनों में अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि शहरी क्षेत्रों में कक्षा 6 और 9 के छात्रों ने सभी विषयों में अपने ग्रामीण समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन किया।यह डेटा यह संकेत करता है कि जैसे-जैसे कक्षा बढ़ती है, शहरी बच्चों को अधिक संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी और शिक्षा की गुणवत्ता एक चुनौती बनी रहती है।

शिक्षा सर्वेक्षण 2025 की रूपरेखा

यह सर्वेक्षण 4 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया था। इसमें देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों की 74,229 स्कूलों को शामिल किया गया। कुल मिलाकर 21,15,022 छात्रों ने इस सर्वे में भाग लिया। कक्षा 3, 6 और 9 के 1,15,022 बच्चों का मूल्यांकन किया गया और 2,70,424 शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों ने प्रश्नावली के माध्यम से उत्तर दिए।

उद्देश्य और नियमितता

इस सर्वे का उद्देश्य छात्रों के संपूर्ण विकास का मूल्यांकन करना और शिक्षा की दिशा में सुधार लाना है। पहले इसे राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) कहा जाता था। अब इसे सिर्फ राष्ट्रीय सर्वेक्षण के रूप में जाना जा रहा है। यह हर तीन साल में एक बार आयोजित किया जाता है। पिछला सर्वे वर्ष 2021 में हुआ था और अब 2025 में इसका आयोजन किया गया।

कक्षा 3 की लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर

रिपोर्ट में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि कक्षा 3 में लड़कियों ने भाषा विषय में लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। लड़कियों को औसतन 65% अंक प्राप्त हुए जबकि लड़कों को 63%। गणित में दोनों का प्रदर्शन लगभग समान (60%) रहा। यह डेटा बताता है कि शिक्षा में लैंगिक असमानता अब कम होती जा रही है और लड़कियां भी अब समान रूप से आगे बढ़ रही है

निष्कर्ष

इस सर्वेक्षण ने शिक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों की ओर स्पष्ट रूप से इशारा किया है, विशेषकर गणित विषय को लेकर। यदि देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाना है, तो प्रारंभिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता, टीचिंग मेथड, और बच्चों की कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर ध्यान देना अनिवार्य होगा।

शिक्षा सर्वेक्षण 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों की आधारभूत गणितीय और भाषा क्षमताओं को लेकर अभी काफी काम किया जाना बाकी है। विशेष रूप से सरकारी स्कूलों में, जहां संसाधनों की कमी और प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है। यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो ये आंकड़े आगे जाकर देश के मानव संसाधन विकास में एक गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

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