भारत सरकार द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों में सतत विकास की दिशा में जिलों के प्रदर्शन को लेकर 2nd SDG Index 2023-24 नई रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय (MoDoNER) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से 2nd SDG Index 2023-24 जारी किया है। यह रिपोर्ट 7 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में सार्वजनिक की गई।
इस सूचकांक में पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों के 121 जिलों के प्रदर्शन का आकलन किया गया है, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) के विभिन्न पहलुओं को आधार बनाया गया है।
यह क्षेत्र भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 8% हिस्सा है और विविध जनजातीय, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासतों से भरपूर है। NER की सीमाएँ भूटान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों से लगती हैं, जिससे यह रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनता है।
NER का अर्थ क्या है ?
NER का पूरा रूप “North Eastern Region” (पूर्वोत्तर क्षेत्र) होता है। यह भारत का एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र है, जिसमें आठ राज्य शामिल हैं । 1. अरुणाचल प्रदेश 2. असम 3. मणिपुर 4. मेघालय 5. मिजोरम 6. नागालैंड 7. सिक्किम 8. त्रिपुरा
यहां की प्रमुख विशेषताएं हैं—घने जंगल, पर्वतीय इलाक़े, जैवविविधता, और जनजातीय जीवनशैली। लेकिन साथ ही, यह क्षेत्र आज भी बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसे सुधारने के लिए SDGs (Sustainable Development Goals) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पूर्वोत्तर भारत में SDGs की भूमिका: अवसर और चुनौतियाँ
पूर्वोत्तर भारत (NER) के लिए सतत विकास लक्ष्य (SDGs) न केवल एक वैश्विक एजेंडा हैं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में अद्वितीय पारिस्थितिकी, सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय परंपराएँ देखने को मिलती हैं। हालांकि, यह क्षेत्र कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे—कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित औद्योगिकरण, कमजोर बुनियादी ढांचा, और जलवायु परिवर्तन का तीव्र प्रभाव।
विशेष रूप से नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में आज भी बड़ी आबादी पारंपरिक कृषि पर निर्भर है, जिससे खाद्य सुरक्षा और आय में अस्थिरता बनी रहती है। महिलाओं, बच्चों और पिछड़े समुदायों को स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की सुविधाओं तक समान पहुंच नहीं है, जिससे SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य), SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), और SDG 5 (लैंगिक समानता) पर नकारात्मक असर पड़ता है।
NITI Aayog के SDG इंडिया इंडेक्स और NER District SDG Index जैसे उपकरण इन राज्यों की प्रगति को मापने और बेहतर नीतियाँ बनाने में मदद कर रहे हैं। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों को सशक्त बनाकर ही NER में SDGs को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।
2nd SDG Index 2023-24 रिपोर्ट का उद्देश्य
इस रिपोर्ट का मूल उद्देश्य यह आकलन करना है कि पूर्वोत्तर भारत के जिले स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ जल, भूख से मुक्ति, रोजगार, और समानता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में किस हद तक प्रगति कर रहे हैं। यह सूचकांक नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
पहला संस्करण अगस्त 2021 में जारी किया गया था, जबकि यह दूसरा संस्करण 2023-24 की स्थिति को दर्शाता है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
85% जिलों ने अपने पिछले प्रदर्शन की तुलना में बेहतर SDG स्कोर हासिल किया है।
मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा के सभी जिले फ्रंट रनर श्रेणी (स्कोर 65 से 99) में शामिल हुए।
हनथियाल (मिजोरम) सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला रहा, जिसका स्कोर 81.43 रहा।
लोंगडिंग (अरुणाचल प्रदेश) सबसे कम स्कोर वाला जिला रहा, इसका स्कोर 58.71 रहा।
नगालैंड के 3 जिलों ने शीर्ष 10 प्रदर्शनकर्ताओं में जगह बनाई।सिक्किम ने सबसे संतुलित प्रदर्शन किया – राज्य के सभी जिलों का स्कोर एक समान रहा।
जिलों का स्कोर आधारित वर्गीकरण
रिपोर्ट में जिलों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
श्रेणी स्कोर रेंज
अचीवर 100 अंक
फ्रंट रनर 65-99 अंक
परफॉर्मर 50-65 अंक
आकांक्षी 50 से कम
> वर्ष 2023-24 में कोई भी जिला अचीवर या आकांक्षी श्रेणी में नहीं आया।
2nd SDG Index 2023-24 पर वरिष्ठ अधिकारियों ने क्या कहा ?
यह सूचकांक नई दिल्ली में नीति आयोग और साझेदार संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी किया गया।
प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे:
श्री सुमन बेरी – उपाध्यक्ष, नीति आयोग
श्री बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम – सीईओ, नीति आयोग
श्री चंचल कुमार – सचिव, MoDoNER
डॉ. एंजेला लुसिगी – भारत में UNDP की प्रतिनिधि
सुमन बेरी ने कहा कि “2030 तक सभी SDG लक्ष्य हासिल करना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के रास्ते में अहम भूमिका निभाएगा।”
राज्यवार श्रेष्ठ और न्यूनतम प्रदर्शनकर्ता जिले (2023-24)
👉अरुणाचल प्रदेश:
श्रेष्ठ जिला: लोअर दिबांग वैली – 73.36 अंक
न्यूनतम स्कोर: लोंगडिंग – 58.71 अंक
👉 असम:
श्रेष्ठ जिला: डिब्रूगढ़ – 74.29 अंक
न्यूनतम स्कोर: साउथ सलमारा-मनकाचर – 59.71 अंक
👉 मणिपुर:
श्रेष्ठ जिला: इम्फाल वेस्ट – 73.21 अंक
न्यूनतम स्कोर: फेरजोल – 59.71 अंक
👉 मेघालय:
श्रेष्ठ जिला: ईस्ट खासी हिल्स – 73.00 अंक
न्यूनतम स्कोर: ईस्ट जयंतिया हिल्स – 63.00 अंक
राज्यवार समग्र प्रदर्शन का विश्लेषण
सिक्किम और त्रिपुरा ने सभी जिलों में स्थिर और उच्च प्रदर्शन दिखाया, जिसमें सभी जिलों के स्कोर एक जैसे रहे।
मिजोरम और नगालैंड में कुछ जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ जिलों के स्कोर अपेक्षाकृत कम रहे, जिससे असमानता दिखी।
असम के सभी जिलों ने Zero Hunger (भूख मुक्ति), स्वच्छ जल, शिक्षा, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में अच्छा सुधार दिखाया।
2nd SDG Index 2023-24 रिपोर्ट का राष्ट्रीय महत्व
बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने पूर्वोत्तर भारत की भूमिका को “अष्ट लक्ष्मी” के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश के राष्ट्रीय विकास लक्ष्य में एक मजबूत स्तंभ है।
चंचल कुमार ने इसे योजनाओं की कमियों को पहचानने और सुधारने का कारगर तरीका बताया।
डॉ. लुसिगी ने कहा कि “डेटा तभी सार्थक होगा जब उसका प्रभाव लोगों के जीवन पर स्पष्ट दिखे।”
निष्कर्ष: विकसित भारत के लक्ष्य की ओर
पूर्वोत्तर भारत के जिलों में सतत विकास के क्षेत्र में यह रिपोर्ट एक दिशा सूचक का कार्य कर रही है। 2030 तक भारत द्वारा SDGs को प्राप्त करने का लक्ष्य केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
इस सूचकांक से यह स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र, जिसकी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना देश के अन्य भागों से अलग है, अब सतत विकास के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

